सुबह डीसीपी तेजा ने कहा- 307, एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज किया

पंजाब के जालंधर सेंट्रल के विधायक रमन अरोड़ा और डीसीपी कानून व्यवस्था नरेश डोगरा के मध्य हुई मारपीट में अब नया मोड़ आ गया। जालंधर के डीसीपी के खिलाफ मारपीट को लेकर सुबह FIR दर्ज की गई, लेकिन दिन निकलते ही उच्चाधिकारियों के दफ्तर पहुंचने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। जालंधर पुलिस ने जो FIR दर्ज की थी उसे फ्रीज कर दिया।

पता चला है कि डीसीपी और विधायक के मध्य हुए विवाद का मामला सीधा डीजीपी के दरबार में पहुंचा था। वहां से आदेश आने के बाद पुलिस ने जो अपने ही डीसीपी नरेश डोगरा के खिलाफ केस दर्ज किया था उसे फिलहाल रोक दिया है। पुलिस के डीसीपी इन्वेस्टिगेशन जसकिरणजीत सिंह तेजा ने अल सुबह पत्रकारों से कहा था कि डीसीपी नरेश डोगरा के खिलाफ हत्या के प्रयास और एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन दोपहर को पुलिस कमिश्नर ने कहा कि कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

पुलिस कमिश्नर गुरशरण सिंह संधू ने कहा कि अभी तक पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद देखा जाएगा कि मामला क्या बनता है। उनसे यह पूछे जाने पर कि सुबह डीसीपी ने कहा था कि मामला दर्ज हो गया है तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है अभी तक कोई FIR नहीं हुई है। सीपी संधू से यह पूछे जाने पर कि विवाद किस-किसके बीच हुआ था तो उन्होंने सवाल को ही टाल दिया।

मामूली विवाद ने ले लिया बड़ा रुप

जिस विवाद को लेकर विधायक रमन अरोड़ा और डीसीपी नरेश डोगरा की आपस में बहसबाजी हुई और नौबत मारपीट तक जा पहुंची वह बिल्कुल मामूली मामला था। जिस व्यक्ति के पीछे डीसीपी डोगरा आए थे उसे वह अपना भांजा कहते हैं। जबकि दूसरा पक्ष विधायक रमन अरोड़ा का समर्थक है। सिर्फ दुकान के आगे टायर रखने को लेकर विवाद शुरु हुआ था। फिर दोनों दुकानदारों ने एक दूसरे के खिलाफ शिकायतें करनी शुरू कर दी। इसी के साथ दोनों टसल बढ़ गई।

डीसीपी डोगरा ने अपने भांजे का पक्ष लेते हुए टायरों की बिजनेस करने वाले दुकानदार को टायर हटाने के लिए कहा तो उसने सीधा विधायक को फोन कर दिया। विधायक ने डीसीपी को फोन कर दिया। विधायक ने कहीं डीसीपी डोगरा को कह दिया का आपका यह क्षेत्र नहीं है तो आप किस हैसियत से टायर वालों को धमका रहे हैं। इस पर डोगरा ने तर्क दिया कि जिसके साथ टायर वालों का विवाद है वह उसका भांजा है और वह उसके साथ धक्का नहीं होने देगा। इसके बाद दोनों में तकरार बढ़ गई और फोन पर ही दोनों में गरमागरमी हो गई।

विधायक ने कहा कि वह वहीं रहें और मौके पर आ रहे हैं। लेकिन डोगरा विवाद टालने के लिए विधायक के आने से पहले ही वहां से चले गए। इसी दौरान डीसीपी डोगरा ने शहर के बिजनेसमैन जिसके विधायक रमन अरोड़ा भी खासमखास हैं को फोन कर दिया कि वह विधायक को कुछ समझाएं। इस पर बिजनेसमैन ने डीसीपी डोगरा को उनके दफ्तर में आने के लिए कहा, साथ ही विधायक अरोड़ा को भी समझौता करवाने के लिए अपने ऑफिस में बुला लिया।

बिजनेसमैन के दफ्तर में डीसीपी डोगरा सिविल ड्रेस में अकेले ही पहुंचे जबकि विधायक के साथ उनके रिश्तेदार, बेटा औऱ दो शहर के बुकी भी थे। इस बैठक में विधायक शीतल अंगुराल पता चला है कि विधायक के साथ आए लोगों में से किसी ने गाली निकाल दी। इस पर डीसीपी तैश में आ गए और दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई।

डीसीपी डोगरा ने किया था डीसीपी तेजा को फोन

गुरु नानक मिशन चौक के पास जिस बिजनेस हाउस में मारपीट हुई वह चार मंजिला है। जब मारपीट हो रही थी को बीच से डीसीपी ने छूट कर भाग गए और बिजनेस हाउस की एक मंजिल पर जाकर छुप गए। वहां से उन्होंने डीसीपी जसकिरणजीत सिंह तेजा को फोन किया और सारे मामले के बारे में बताया। इसी दौरान विधायक ने मौके पर अपने समर्थक बुला लिए। साथ ही उन्होंने इसके बारे में जालंधर वेस्ट के विधायक शीतल अंगुराल को भी बताया। वह भी अपने समर्थकों के साथ वहां पर पहुंच गए।

इतने में ही मौके पर पुलिस फोर्स लेकर डीसीपी तेजा भी पहुंच गए, लेकिन उनके पहुंचने से पहले विधायक के लोगों ने डीसीपी डोगरा को पकड़ लिया था। उन्हें मारापीटा जा रहा था। उसका एक वीडियो भी वारयल हुआ है जिसमें उन्हें जमीन पर बैठाया गया है। इतने में जसकिरणजीत सिंह तेजा भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बमुश्किल डीसीपी तेजा को भीड़ में से सुरक्षित निकाला और घर भेजा।

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